Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.84.77: राजन! कोटितीर्थ में स्नान करके कार्तिकेयजी का पूजन करने से मनुष्य हजार गोदान का फल पाता है और तेजस्वी हो जाता है ॥77॥   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.84.77 
कोटितीर्थे नर: स्नात्वा अर्चयित्वा गुहं नृप।
गोसहस्रफलं विद्यात् तेजस्वी च भवेन्नर:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
राजन! कोटितीर्थ में स्नान करके कार्तिकेयजी का पूजन करने से मनुष्य हजार गोदान का फल पाता है और तेजस्वी हो जाता है ॥77॥
 
Rajan! By taking bath in Kotitirtha and worshiping Karthikeyaji, a person gets the fruit of thousand Godan and becomes radiant. 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)