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श्लोक 3.84.76  |
ततो गच्छेत राजेन्द्र भर्तृस्थानमनुत्तमम्।
अश्वमेधस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानव:॥ ७६॥ |
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| अनुवाद |
| राजेन्द्र! वहाँ से उत्तम स्थान भर्तृस्थान जाओ। वहाँ जाने से अश्वमेधयज्ञ का फल मिलता है ॥76॥ |
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| Rajendra! From there go to the best place Bhartristhan. By going there one gets the results of Ashwamedhyayagya. 76॥ |
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