Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.84.67-68h: तत्पश्चात बहुदातीर्थ में जाकर एकाग्रचित्त होकर ब्रह्मचर्य का पालन करे और वहाँ एक रात्रि उपवास करे; इससे वह स्वर्ग में सम्मानित होता है। कुरुनन्दन! उसे देवसत्रयज्ञ का भी फल प्राप्त होता है। 67 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात बहुदातीर्थ में जाकर एकाग्रचित्त होकर ब्रह्मचर्य का पालन करे और वहाँ एक रात्रि उपवास करे; इससे वह स्वर्ग में सम्मानित होता है। कुरुनन्दन! उसे देवसत्रयज्ञ का भी फल प्राप्त होता है। 67 1/2॥
Thereafter, go to Bahudatirtha and observe celibacy with concentration and fast for one night there; Due to this he is honored in heaven. Kurunandan! He also gets the results of Devsatrayagya. 67 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥