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श्लोक 3.84.65  |
गङ्गोद्भेदं समासाद्य त्रिरात्रोपोषितो नर:।
वाजपेयमवाप्नोति ब्रह्मभूतो भवेत् सदा॥ ६५॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य गंगोद्भेद तीर्थ में जाकर तीन रात्रि तक उपवास करता है, उसे वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है और वह सदा के लिए ब्रह्म में एक हो जाता है ॥ 65॥ |
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| A person who goes to the Gangodbhed Tirtha and fasts for three nights obtains the fruits of the Vajapeya Yagya and becomes one with the Brahma forever. ॥ 65॥ |
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