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श्लोक 3.84.61  |
तत्र मासं वसेद् धीरो नैमिषे तीर्थतत्पर:।
पृथिव्यां यानि तीर्थानि तानि तीर्थानि नैमिषे॥ ६१॥ |
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| अनुवाद |
| धैर्यवान मनुष्य को तीर्थों के दर्शन हेतु तत्पर होकर एक मास तक नैमिषारण्य में रहना चाहिए। पृथ्वी के सभी तीर्थ नैमिषारण्य में विद्यमान हैं। 61. |
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| A patient man should stay in Naimisharanya for a month, being ready to visit holy places. All the holy places on earth are present in Naimisharanya. 61. |
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