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mahabharat 3.84.54-55: जो मनुष्य षष्ठी तिथि का व्रत करता है और एक मास तक महालया तीर्थ में निवास करता है, वह सभी पापों से शुद्ध हो जाता है और उसे बहुत सारा स्वर्ण प्राप्त होता है। वह दस पीढ़ियों पूर्व और दस पीढ़ियों बाद भी मोक्ष प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  3.84.54-55 
षष्ठकालोपवासेन मासमुष्य महालये॥ ५४॥
सर्वपापविशुद्धात्मा विन्देद् बहुसुवर्णकम्।
दशापरान् दश पूर्वान्नरानुद्धरते कुलम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य षष्ठी तिथि का व्रत करता है और एक मास तक महालया तीर्थ में निवास करता है, वह सभी पापों से शुद्ध हो जाता है और उसे बहुत सारा स्वर्ण प्राप्त होता है। वह दस पीढ़ियों पूर्व और दस पीढ़ियों बाद भी मोक्ष प्राप्त करता है।
 
One who fasts on the sixth day and stays at Mahalaya Tirtha for a month, becomes pure from all sins and obtains a lot of gold. He also liberates ten generations before and ten generations after.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)