श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.84.44 
यमुनाप्रभवं गत्वा समुपस्पृश्य यामुनम्।
अश्वमेधफलं लब्ध्वा स्वर्गलोके महीयते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
यमुनाप्रभाव नामक तीर्थस्थान में जाकर यमुना के जल में स्नान करके तथा अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करके मनुष्य स्वर्गलोक में निवास प्राप्त करता है ॥ 44॥
 
By going to the pilgrimage place called Yamunaprabhava and taking a bath in the water of the Yamuna and obtaining the fruit of the Ashwamedha Yagna, a man attains residence in the heavenly world. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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