श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.84.4 
सौगन्धिकवनं राजंस्ततो गच्छेत मानव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजन! उसके बाद मनुष्य को सौगन्धिक वन में जाना चाहिए॥4॥
 
Rajan! After that man should go to Saugandhik forest. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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