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mahabharat 3.84.39: जो मनुष्य भगवान् भद्रकर्णेश्वर के समीप जाकर उनकी विधिपूर्वक पूजा करता है, वह कभी दुःख में नहीं पड़ता और स्वर्ग में पूजित होता है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.84.39 
भद्रकर्णेश्वरं गत्वा देवमर्च्य यथाविधि।
न दुर्गतिमवाप्नोति नाकपृष्ठे च पूज्यते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य भगवान् भद्रकर्णेश्वर के समीप जाकर उनकी विधिपूर्वक पूजा करता है, वह कभी दुःख में नहीं पड़ता और स्वर्ग में पूजित होता है ॥39॥
 
A person who goes near Lord Bhadrakarneshwar and worships him properly, never falls into misery and is worshiped in heaven. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)