श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.84.38 
गङ्गायाश्च नरश्रेष्ठ सरस्वत्याश्च संगमे।
स्नात्वाश्वमेधं प्राप्नोति स्वर्गलोकं च गच्छति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! गंगा और सरस्वती के संगम में स्नान करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और स्वर्ग को जाता है॥38॥
 
O best of men! By bathing in the confluence of the Ganges and Saraswati a man attains the fruit of performing the Ashwamedha Yagya and goes to heaven. ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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