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श्लोक 3.84.38  |
गङ्गायाश्च नरश्रेष्ठ सरस्वत्याश्च संगमे।
स्नात्वाश्वमेधं प्राप्नोति स्वर्गलोकं च गच्छति॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुरुषश्रेष्ठ! गंगा और सरस्वती के संगम में स्नान करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और स्वर्ग को जाता है॥38॥ |
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| O best of men! By bathing in the confluence of the Ganges and Saraswati a man attains the fruit of performing the Ashwamedha Yagya and goes to heaven. ॥ 38॥ |
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