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श्लोक 3.84.33  |
तत्राभिषेकं कुर्वीत नागतीर्थे नराधिप।
कपिलानां सहस्रस्य फलं विन्दति मानव:॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! वहाँ नागतीर्थ में स्नान करना चाहिए। इससे मनुष्य को हजारों कपिलदानों का फल मिलता है ॥33॥ |
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| Maharaj! One should take bath in Nagtirtha there. Through this a person gets the fruit of thousands of Kapiladans. 33॥ |
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