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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.84.30 
तत: कनखले स्नात्वा त्रिरात्रोपोषितो नर:।
अश्वमेधमवाप्नोति स्वर्गलोकं च गच्छति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात जो मनुष्य कनखल में स्नान करके तीन रात्रि तक उपवास करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है और वह स्वर्ग जाता है।
 
Thereafter a person who bathes in Kankhal and fasts for three nights obtains the fruits of performing Ashwamedha Yagya and goes to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)