Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.84.29: जो मनुष्य सप्त गंगा, त्रि गंगा और शक्रवर्त तीर्थ में देवताओं और पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करता है, वह पुण्यलोक में प्रतिष्ठित होता है ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.84.29 
सप्तगङ्गे त्रिगङ्गे च शक्रावर्ते च तर्पयन्।
देवान् पितृृंश्च विधिवत् पुण्ये लोके महीयते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सप्त गंगा, त्रि गंगा और शक्रवर्त तीर्थ में देवताओं और पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करता है, वह पुण्यलोक में प्रतिष्ठित होता है ॥29॥
 
A person who ritually offers offerings to the gods and ancestors in Sapta Ganga, Tri Ganga and Shakravarta Tirtha is respected in the world of virtues. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)