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mahabharat 3.84.18-19: तत्पश्चात् त्रिभुवन में प्रसिद्ध सुवर्णतीर्थ का दर्शन करो। वहाँ प्राचीन काल में भगवान विष्णु ने रुद्रदेव की प्रसन्नता के लिए उनकी आराधना की थी और उनसे अनेक दुर्लभ एवं उत्तम वर प्राप्त किए थे। 18-19॥   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.84.18-19 
ततो गच्छेत् सुवर्णाख्यं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्॥ १८॥
तत्र विष्णु: प्रसादार्थं रुद्रमाराधयत् पुरा।
वरांश्च सुबहूँल्लेभे दैवतेषु सुदुर्लभान्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् त्रिभुवन में प्रसिद्ध सुवर्णतीर्थ का दर्शन करो। वहाँ प्राचीन काल में भगवान विष्णु ने रुद्रदेव की प्रसन्नता के लिए उनकी आराधना की थी और उनसे अनेक दुर्लभ एवं उत्तम वर प्राप्त किए थे। 18-19॥
 
After that, visit the famous Suvarnatirtha in Tribhuvan. There in ancient times, Lord Vishnu worshiped Rudradev for his happiness and obtained many rare and excellent boons from him. 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)