vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा
»
श्लोक 156
श्लोक
3.84.156
कालिकासंगमे स्नात्वा कौशिक्यरुणयोर्गत:।
त्रिरात्रोपोषितो राजन् सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ १५६॥
अनुवाद
राजन! जो मनुष्य कौशिकी-अरुणा-संगम और कालिका-संगम में स्नान करता है और तीन रात तक उपवास करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
King! A person who bathes in the Kaushiki-Aruna-Sangam and the Kalika-Sangam and fasts for three nights is freed from all sins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×