| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा » श्लोक 149 |
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| | | | श्लोक 3.84.149  | पितामहस्य सरस: प्रस्रुता लोकपावनी।
कुमारधारा तत्रैव त्रिषु लोकेषु विश्रुता॥ १४९॥ | | | | | | अनुवाद | | पितामहासरोवरसे सम्पूर्ण जगत् को पवित्र करनेवाली एक जलधारा प्रवाहित होती है, जो तीनों लोकोंमें कुमारधाराके नामसे प्रसिद्ध है ॥149॥ | | | | A stream that purifies the entire world flows from Pitamahasarovar, which is famous in all the three worlds by the name of Kumardhara. 149॥ | | ✨ ai-generated | | |
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