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श्लोक 3.84.148  |
पितामहसरो गत्वा शैलराजसमीपत:।
तत्राभिषेकं कुर्वाणो ह्यग्निष्टोममवाप्नुयात्॥ १४८॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य गिरिराज हिमालय के निकट पितामहसरोवर में जाकर स्नान करता है, उसे अग्निष्टोमयाग का फल प्राप्त होता है ॥148॥ |
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| A person who goes to Pitamahsarovar near Giriraj Himalaya and takes bath gets the results of Agnishtomayagya. 148॥ |
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