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mahabharat 3.84.142-143: राजा! फिर कौशिक ऋषि के उस सरोवर में स्नान करने जाओ, जहाँ कुशिकानन्दन विश्वामित्र ने महान सिद्धि प्राप्त की थी। वीर! हे भरतवंशी! कौशिकी नदी के तट पर उस तीर्थ में एक मास तक निवास करो। 142-143।   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 142-143
 
 
श्लोक  3.84.142-143 
ततो गच्छेत राजेन्द्र कौशिकस्य मुनेर्ह्रदम्॥ १४२॥
यत्र सिद्धिं परां प्राप्तो विश्वामित्रोऽथ कौशिक:।
तत्र मासं वसेद् वीर कौशिक्यां भरतर्षभ॥ १४३॥
 
 
अनुवाद
राजा! फिर कौशिक ऋषि के उस सरोवर में स्नान करने जाओ, जहाँ कुशिकानन्दन विश्वामित्र ने महान सिद्धि प्राप्त की थी। वीर! हे भरतवंशी! कौशिकी नदी के तट पर उस तीर्थ में एक मास तक निवास करो। 142-143।
 
King! Then go to bathe in the pond of sage Kaushik, where Kushikanandan Vishwamitra had attained great success. Brave! O jewel of the Bharata clan! Stay in that pilgrimage on the banks of the river Kaushiki for a month. 142-143.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)