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mahabharat 3.84.14-15: हे मनुष्यों के स्वामी! ऐसा कहा जाता है कि जिस देवी ने उत्तम व्रत का पालन किया था, उसने एक हजार दिव्य वर्षों तक एक-एक मास केवल शाक खाया था। देवी की भक्ति से प्रभावित होकर अनेक तपस्वी ऋषि वहाँ आये। हे प्रभु! देवी ने उन ऋषियों का भी शाक से ही सत्कार किया। 14-15।   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.84.14-15 
दिव्यं वर्षसहस्रं हि शाकेन किल सुव्रता।
आहारं सा कृतवती मासि मासि नराधिप॥ १४॥
ऋषयोऽभ्यागतास्तत्र देव्या भक्त्या तपोधना:।
आतिथ्यं च कृतं तेषां शाकेन किल भारत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! ऐसा कहा जाता है कि जिस देवी ने उत्तम व्रत का पालन किया था, उसने एक हजार दिव्य वर्षों तक एक-एक मास केवल शाक खाया था। देवी की भक्ति से प्रभावित होकर अनेक तपस्वी ऋषि वहाँ आये। हे प्रभु! देवी ने उन ऋषियों का भी शाक से ही सत्कार किया। 14-15।
 
O Lord of men! It is said that the Goddess who observed the best fast, ate only vegetables for one month each for a thousand divine years. Impressed by the devotion of the Goddess, many sages who were ascetics came there. O Lord! The Goddess also hosted those sages with vegetables only. 14-15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)