श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 138-140
 
 
श्लोक  3.84.138-140 
निश्चीरां च समासाद्य त्रिषु लोकेषु विश्रुताम्॥ १३८॥
अश्वमेधमवाप्नोति विष्णुलोकं च गच्छति।
ये तु दानं प्रयच्छन्ति निश्चीरासंगमे नरा:॥ १३९॥
ते यान्ति नरशार्दूल शक्रलोकमनामयम्।
तत्राश्रमो वसिष्ठस्य त्रिषु लोकेषु विश्रुत:॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात तीनों लोकों में प्रसिद्ध निश्चिरा नदी का दर्शन करो । इससे अश्वमेध्ययज्ञ का फल प्राप्त होता है और तीर्थयात्री भगवान विष्णु के लोक को जाता है । हे पुरुषश्रेष्ठ ! जो मनुष्य निश्चिरासंगम में दान करते हैं, वे रोग और शोक से मुक्त होकर इन्द्रलोक को जाते हैं । वहाँ तीनों लोकों में प्रसिद्ध वसिष्ठ आश्रम है । 138—140॥
 
After that, visit the famous Nishchira river of the three worlds. By this one gets the results of Ashwamedhyayagya and the pilgrim man goes to the world of Lord Vishnu. Male best! Those people who donate in Nishchirasangam, go to Indraloka, free from diseases and sorrows. There is the famous Vasishtha Ashram in all the three worlds. 138—140॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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