vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा
»
श्लोक 125
श्लोक
3.84.125
अभिगम्य त्रिलोकेशं वरदं विष्णुमव्ययम्।
अश्वमेधमवाप्नोति विष्णुलोकं च गच्छति॥ १२५॥
अनुवाद
तीनों लोकों के स्वामी अविनाशी भगवान विष्णु के समीप जाने से मनुष्य अश्वमेध्ययज्ञ का फल प्राप्त करता है और विष्णुलोक को जाता है ॥125॥
By going near the indestructible Lord Vishnu, the lord of the three worlds, a person gets the results of Ashwamedhyayagya and goes to Vishnuloka. 125॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×