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mahabharat 3.84.113: गण्डकी नदी समस्त तीर्थों के जल से उत्पन्न हुई है। वहाँ जाने वाला तीर्थयात्री अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और सूर्यलोक को जाता है। 113.   |   mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.84.113 
गण्डकीं तु समासाद्य सर्वतीर्थजलोद्भवाम्।
वाजपेयमवाप्नोति सूर्यलोकं च गच्छति॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
गण्डकी नदी समस्त तीर्थों के जल से उत्पन्न हुई है। वहाँ जाने वाला तीर्थयात्री अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और सूर्यलोक को जाता है। 113.
 
The river Gandaki is born from the water of all the holy places. A pilgrim going there gets the fruits of performing Ashwamedha Yagna and goes to Surya Loka. 113.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)