Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.84.104-106h: नरेश्वर! तत्पश्चात तीर्थ की सेवा करने वाला मनुष्य राजभवन में जाए। वहाँ स्नान करके वह गृहिणी के समान सुखी हो जाता है। उस तीर्थ में शुद्ध होकर मनुष्य को यक्षिणीदेवी को अर्पित नैवेद्य का सेवन करना चाहिए। यक्षिणी के नैवेद्य से वह ब्रह्महत्या से मुक्त हो जाता है। 104-105 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! तत्पश्चात तीर्थ की सेवा करने वाला मनुष्य राजभवन में जाए। वहाँ स्नान करके वह गृहिणी के समान सुखी हो जाता है। उस तीर्थ में शुद्ध होकर मनुष्य को यक्षिणीदेवी को अर्पित नैवेद्य का सेवन करना चाहिए। यक्षिणी के नैवेद्य से वह ब्रह्महत्या से मुक्त हो जाता है। 104-105 1/2॥
Nareshwar! After that the person serving the pilgrimage should go to the royal house. After taking bath there, he becomes as happy as a housewife. In that pilgrimage, after becoming pure, a man should eat the offerings made to Yakshinidevi. By the offerings of Yakshini, he becomes free from Brahmahatya. 104-105 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥