Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.84.101-102: वहाँ भवितात्मा महर्षि मतंग का आश्रम है। उस सुन्दर आश्रम में प्रवेश करने से, जो श्रम और दुःख का नाश करता है, मनुष्य गवामयनयज्ञ का फल प्राप्त करता है। वहाँ धर्म के समीप जाकर, उनकी मूर्ति का दर्शन और स्पर्श करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 3.84: नाना प्रकारके तीर्थोंकी महिमा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ भवितात्मा महर्षि मतंग का आश्रम है। उस सुन्दर आश्रम में प्रवेश करने से, जो श्रम और दुःख का नाश करता है, मनुष्य गवामयनयज्ञ का फल प्राप्त करता है। वहाँ धर्म के समीप जाकर, उनकी मूर्ति का दर्शन और स्पर्श करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
There is the ashram of Bhavitatma Maharishi Matang. By entering that beautiful ashram which destroys labor and sorrow, a person gets the fruit of Gavamayanayagya. There, by going near Dharma and seeing and touching his idol, one gets the results of Ashwamedha Yagya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥