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mahabharat 3.83.98-99: किन्दत्त नामक कुएँ के पास जाकर एक प्रस्थ अर्थात् सोलह मुट्ठी तिल दान करो। कुरुश्रेष्ठ! ऐसा करने से मनुष्य तीनों ऋणों से मुक्त होकर परम सिद्धि प्राप्त करता है। वेदी-तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को एक हजार गोदान का फल मिलता है। 98-99॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 98-99
 
 
श्लोक  3.83.98-99 
किंदत्तं कूपमासाद्य तिलप्रस्थं प्रदाय च॥ ९८॥
गच्छेत परमां सिद्धिमृणैर्मुक्त: कुरूद्वह।
वेदीतीर्थे नर: स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
किन्दत्त नामक कुएँ के पास जाकर एक प्रस्थ अर्थात् सोलह मुट्ठी तिल दान करो। कुरुश्रेष्ठ! ऐसा करने से मनुष्य तीनों ऋणों से मुक्त होकर परम सिद्धि प्राप्त करता है। वेदी-तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को एक हजार गोदान का फल मिलता है। 98-99॥
 
Go near a well named Kindatta and donate one Prastha i.e. sixteen handfuls of sesame seeds. Kurushrestha! By doing this, man becomes free from all three debts and attains ultimate success. By taking bath in Vedi-tirtha, a person gets the result of thousand Godan. 98-99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)