Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.83.95-96h: हे भारत! जो मनुष्य कौशिकी और दृषद्वती के संगम पर स्नान करता है और नियमपूर्वक भोजन करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥95 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 95-96h
 
 
श्लोक  3.83.95-96h 
कौशिक्या: संगमे यस्तु दृषद्वत्याश्च भारत॥ ९५॥
स्नाति वै नियताहार: सर्वपापै: प्रमुच्यते।
 
 
अनुवाद
हे भारत! जो मनुष्य कौशिकी और दृषद्वती के संगम पर स्नान करता है और नियमपूर्वक भोजन करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥95 1/2॥
 
Bharat! He who bathes at the confluence of Kaushiki and Drishadvati and eats in a disciplined manner, becomes free from all sins. ॥ 95 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)