Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.83.94-95h: मधुवती में जाकर देवी तीर्थ में स्नान करके, वहाँ देवताओं और पितरों का पूजन करके जो मनुष्य शुद्ध हो जाता है, उसे देवी की आज्ञा से एक हजार गौओं का दान करने का फल मिलता है ॥94 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  3.83.94-95h 
गत्वा मधुवटीं चैव देव्यास्तीर्थे नर: शुचि:।
तत्र स्नात्वार्चयित्वा च पितॄन् देवांश्च पूरुष:॥ ९४॥
स देव्या समनुज्ञातो गोसहस्रफलं लभेत्।
 
 
अनुवाद
मधुवती में जाकर देवी तीर्थ में स्नान करके, वहाँ देवताओं और पितरों का पूजन करके जो मनुष्य शुद्ध हो जाता है, उसे देवी की आज्ञा से एक हजार गौओं का दान करने का फल मिलता है ॥94 1/2॥
 
Going to Madhuvati and taking bath in the Devi Tirtha, a person who becomes pure, after worshipping the gods and ancestors there, gets the reward of donating a thousand cows as per the Goddess' command. ॥94 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)