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mahabharat 3.83.9: तत्पश्चात्, महाबली यक्ष, द्वारपाल मचरुक को नमस्कार करने मात्र से ही एक हजार गायों के दान का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.83.9 
ततो मचक्रुकं नाम द्वारपालं महाबलम्।
यक्षं समभिवाद्यैव गोसहस्रफलं लभेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, महाबली यक्ष, द्वारपाल मचरुक को नमस्कार करने मात्र से ही एक हजार गायों के दान का फल प्राप्त होता है।
 
Thereafter, simply by saluting the mighty Yaksha, the gatekeeper named Machruk, one gets the reward of donating a thousand cows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)