Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.83.86-90: राजेन्द्र! वहाँ से फल्कीवन नामक महान तीर्थस्थान पर जाओ। राजन्! देवतागण सदैव फलों के वन में निवास करते हैं और वहाँ कई सहस्त्रों वर्षों तक घोर तपस्या में लीन रहते हैं। भारतवर्ष में दृषद्वती में स्नान करके देवताओं तथा पितरों का तर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम तथा अतिरात्रयज्ञों का फल प्राप्त करता है। भारतवर्ष में दृषद्वती में स्नान करके देवताओं तथा पितरों का तर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम तथा अतिरात्रयज्ञों का फल प्राप्त करता है। भारतवर्ष में दृषद्वती में स्नान करके देवताओं तथा पितरों का तर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम तथा अतिरात्रयज्ञों का फल प्राप्त करता है; साथ ही राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त करके मुनियों के लोक में जाता है। | mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! वहाँ से फल्कीवन नामक महान तीर्थस्थान पर जाओ। राजन्! देवतागण सदैव फलों के वन में निवास करते हैं और वहाँ कई सहस्त्रों वर्षों तक घोर तपस्या में लीन रहते हैं। भारतवर्ष में दृषद्वती में स्नान करके देवताओं तथा पितरों का तर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम तथा अतिरात्रयज्ञों का फल प्राप्त करता है। भारतवर्ष में दृषद्वती में स्नान करके देवताओं तथा पितरों का तर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम तथा अतिरात्रयज्ञों का फल प्राप्त करता है। भारतवर्ष में दृषद्वती में स्नान करके देवताओं तथा पितरों का तर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम तथा अतिरात्रयज्ञों का फल प्राप्त करता है; साथ ही राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त करके मुनियों के लोक में जाता है।
Rajendra! From there visit a great pilgrimage place called Falkivan. Rajan! The gods always reside in the forest of fruits and remain engaged in severe penance there for many thousands of years. India By taking bath in Drishadwati and offering offerings to the gods and ancestors, a person gets the results of Agnishtom and Atiratra Yagyas. Bharatsattam Rajendra! By taking bath in Sarvdevtirtha, a person gets the result of thousand Godan. India By taking bath in Panikhatatirtha and offering prayers to the gods and ancestors, a person attains the results of Agnishtom and Atiratrayagyas; At the same time, he gets the fruits of Rajasuya Yagya and goes to the world of sages.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥