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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  3.83.84 
ततस्त्रिविष्टपं गच्छेत् त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्।
तत्र वैतरणी पुण्या नदी पापप्रणाशिनी॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात तीनों लोकों में प्रसिद्ध त्रिविष्टपति तीर्थ पर जाओ। वहाँ वैतरणी नाम की पुण्य पाप नाशी नदी है।
 
After that go to Trivishtapatirtha, famous in all the three worlds. There is a virtuous sin destroyer river named Vaitarani.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)