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mahabharat 3.83.82: उस तीर्थ में स्नान करके प्राण त्यागकर मनुष्य नारदजी की आज्ञा से उत्तम लोकों को जाता है ॥82॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.83.82 
तत्र तीर्थे नर: स्नात्वा प्राणानुत्सृज्य भारत।
नारदेनाभ्यनुज्ञातो लोकान् प्राप्नोत्यनुत्तमान्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
उस तीर्थ में स्नान करके प्राण त्यागकर मनुष्य नारदजी की आज्ञा से उत्तम लोकों को जाता है ॥82॥
 
India After taking bath in that pilgrimage, after giving up one's life, one goes to the best worlds as per the orders of Naradji. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)