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mahabharat 3.83.80: कलशीतीर्थ में जल ग्रहण करने से श्रद्धालु एवं संवेदनशील व्यक्ति को अग्निष्टोमयाग्य का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  3.83.80 
कलश्यां वार्युपस्पृश्य श्रद्दधानो जितेन्द्रिय:।
अग्निष्टोमस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानव:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
कलशीतीर्थ में जल ग्रहण करने से श्रद्धालु एवं संवेदनशील व्यक्ति को अग्निष्टोमयाग्य का फल प्राप्त होता है।
 
By inhaling water in Kalshitirtha, a devout and sensitive person gets the results of Agnistomayagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)