रुद्रकोटॺां तथा कूपे ह्रदेषु च महीपते।
इलास्पदं च तत्रैव तीर्थं भरतसत्तम॥ ७७॥
तत्र स्नात्वार्चयित्वा च दैवतानि पितॄनथ।
न दुर्गतिमवाप्नोति वाजपेयं च विन्दति॥ ७८॥
अनुवाद
राजन! ये सभी तीर्थ रुद्रकोटि में, कुओं में और तालाबों में हैं। हे भारत के शिरोमणि! वहीं इलास्पदतीर्थ है, जहाँ स्नान करके देवताओं और पितरों का पूजन करने से मनुष्य कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता तथा वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त करता है।
King! All these pilgrimages are in Rudrakotim, wells and tanks. O head of Bharat! There itself is the Ilaspadtirtha, where by taking bath and worshipping the gods and ancestors, a man never falls into misfortune and gets the fruits of the Vajpayee Yagya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥