Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.83.65-67h: राजेन्द्र! उसके बाद प्रसिद्ध मनुष्टि तीर्थ पर जाओ। राजन्! वहाँ शिकारी के बाणों से घायल हुआ काला हिरण उस सरोवर में गोता लगाकर पुनः मनुष्य रूप में आ गया, इसलिए उसका नाम मनुष्टि तीर्थ है। जो मनुष्य ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए एकाग्रचित्त होकर उस तीर्थ में स्नान करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में प्रतिष्ठित होता है। 65-66 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! उसके बाद प्रसिद्ध मनुष्टि तीर्थ पर जाओ। राजन्! वहाँ शिकारी के बाणों से घायल हुआ काला हिरण उस सरोवर में गोता लगाकर पुनः मनुष्य रूप में आ गया, इसलिए उसका नाम मनुष्टि तीर्थ है। जो मनुष्य ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए एकाग्रचित्त होकर उस तीर्थ में स्नान करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में प्रतिष्ठित होता है। 65-66 1/2॥
Rajendra! After that go to the famous Manushtirtha. Rajan! There, the blackbuck, which had been hit by the hunter's arrows, dived into that lake and regained human form, hence its name is Manustirtha. A person who follows celibacy and has a concentrated mind and takes bath in that pilgrimage, becomes free from all sins and is established in heaven. 65-66 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥