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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.83.64 
दशाश्वमेधिकं चैव तस्मिंस्तीर्थे महीपते।
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र गच्छेत परमां गतिम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! वहाँ दशाश्वमेधि तीर्थ भी है। हे मनुष्य! वहाँ स्नान करने से मनुष्य परम गति को प्राप्त होता है। 64.
 
O King! There is also the Dashaswamedhi Tirtha. O man! By taking bath there, a man attains the highest state. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)