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mahabharat 3.83.53-54h: राजेंद्र! इसके बाद श्रेष्ठ मनुष्य को ब्रह्मावर्ततीर्थ में जाना चाहिए। ब्रह्मावर्त में स्नान करने से मनुष्य को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। 53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  3.83.53-54h 
ततो गच्छेत राजेन्द्र ब्रह्मावर्तं नरोत्तम:॥ ५३॥
ब्रह्मावर्ते नर: स्नात्वा ब्रह्मलोकमवाप्नुयात्।
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! इसके बाद श्रेष्ठ मनुष्य को ब्रह्मावर्ततीर्थ में जाना चाहिए। ब्रह्मावर्त में स्नान करने से मनुष्य को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। 53 1/2॥
 
Rajendra! After that the best human being should go to Brahmavartatirtha. By taking bath in Brahmavarta, man attains Brahmalok. 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)