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mahabharat 3.83.50: तत्पश्चात् तीर्थयात्री क्रमशः गोभवनतीर्थ में जाकर वहाँ स्नान करते हैं, इससे उन्हें सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.83.50 
गवां भवनमासाद्य तीर्थसेवी यथाक्रमम्।
तत्राभिषेकं कुर्वाणो गोसहस्रफलं लभेत्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तीर्थयात्री क्रमशः गोभवनतीर्थ में जाकर वहाँ स्नान करते हैं, इससे उन्हें सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है ॥50॥
 
After that the pilgrims respectively go to Gobhavantirtha and take bath there. Due to this he gets the result of thousands of Godan. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)