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mahabharat 3.83.37-38: इसमें कोई संदेह नहीं कि आपके बनाए ये कुण्ड पवित्र तीर्थस्थान होंगे। जो मनुष्य इन कुण्डों में स्नान करके अपने पितरों का तर्पण करेंगे, उन्हें तृप्त पितरगण ऐसा वर प्रदान करेंगे जो इस पृथ्वी पर दुर्लभ है। वे उनकी अभीष्ट कामनाओं को तथा शाश्वत स्वर्ग को उनके लिए सुलभ कर देंगे।॥37-38॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  3.83.37-38 
ह्रदाश्च तव तीर्थत्वं गमिष्यन्ति न संशय:।
ह्रदेषु तेषु य: स्नात्वा पितॄन् संतर्पयिष्यति॥ ३७॥
पितरस्तस्य वै प्रीता दास्यन्ति भुवि दुर्लभम्।
ईप्सितं च मन:कामं स्वर्गलोकं च शाश्वतम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि आपके बनाए ये कुण्ड पवित्र तीर्थस्थान होंगे। जो मनुष्य इन कुण्डों में स्नान करके अपने पितरों का तर्पण करेंगे, उन्हें तृप्त पितरगण ऐसा वर प्रदान करेंगे जो इस पृथ्वी पर दुर्लभ है। वे उनकी अभीष्ट कामनाओं को तथा शाश्वत स्वर्ग को उनके लिए सुलभ कर देंगे।॥37-38॥
 
‘There is no doubt that these kunds made by you will be sacred places of pilgrimage. Those who will bathe in these kunds and offer oblations to their ancestors, the satisfied ancestors will grant them such a boon which is rare on this earth. They will make their desired wishes and the eternal heaven accessible to them.’॥ 37-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)