vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन
»
श्लोक 23
श्लोक
3.83.23
तत्रैव च महाराज यक्षिणीं लोकविश्रुताम्।
स्नात्वाभिगम्य राजेन्द्र सर्वान् कामानवाप्नुयात्॥ २३॥
अनुवाद
महाराज! वहाँ प्रसिद्ध यक्षिणीतीर्थ है। राजेन्द्र! वहाँ जाकर स्नान करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। 23॥
Maharaj! There is the famous Yakshiniteertha. Rajendra! By going there and taking bath, all the wishes are fulfilled. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×