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mahabharat 3.83.208: तरन्तुक और अरन्तुक तथा रामह्रद और मचरुक के बीच का भूभाग कुरुक्षेत्र और समन्तपंचक है। इसे ब्रह्माजी की उत्तरवेदी कहते हैं। 208।   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  3.83.208 
तरन्तुकारन्तुकयोर्यदन्तरं
रामह्रदानां च मचक्रुकस्य च।
एतत् कुरुक्षेत्रसमन्तपञ्चकं
पितामहस्योत्तरवेदिरुच्यते॥ २०८॥
 
 
अनुवाद
तरन्तुक और अरन्तुक तथा रामह्रद और मचरुक के बीच का भूभाग कुरुक्षेत्र और समन्तपंचक है। इसे ब्रह्माजी की उत्तरवेदी कहते हैं। 208।
 
The land between Tarantuk and Arantuk and Ramhrad and Machruk is Kurukshetra and Samantapanchaka. It is called Uttarvedi of Brahmaji. 208.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि पुलस्त्यतीर्थयात्रायां त्र्यशीतितमोऽध्याय:॥ ८३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें पुलस्त्यतीर्थयात्राविषयक तिरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)