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mahabharat 3.83.206-207: कुरुक्षेत्र ब्रह्माजी की वेदी है, इस पवित्र स्थान पर ब्रह्मऋषियों का आगमन होता है। वहाँ निवास करने वाले मनुष्य किसी भी दुःखमय स्थिति में नहीं पड़ते। 206-207।   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 206-207
 
 
श्लोक  3.83.206-207 
ब्रह्मवेदी कुरुक्षेत्रं पुण्यं ब्रह्मर्षिसेवितम्॥ २०६॥
तस्मिन् वसन्ति ये मर्त्या न ते शोच्या: कथंचन॥ २०७॥
 
 
अनुवाद
कुरुक्षेत्र ब्रह्माजी की वेदी है, इस पवित्र स्थान पर ब्रह्मऋषियों का आगमन होता है। वहाँ निवास करने वाले मनुष्य किसी भी दुःखमय स्थिति में नहीं पड़ते। 206-207।
 
Kurukshetra is the altar of Brahmaji, this holy place is visited by Brahmarishis. The human beings who reside there do not fall into any sorrowful situation. 206-207.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)