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mahabharat 3.83.200: तत्पश्चात् मचक्रूक नामक द्वारपाल यक्ष को प्रणाम करके कोटितीर्थ में स्नान करने से मनुष्य प्रचुर स्वर्ण-धन प्राप्त करता है ॥200॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  3.83.200 
अभिवाद्य ततो यक्षं द्वारपालं मचक्रुकम्।
कोटितीर्थमुपस्पृश्य लभेद् बहुसुवर्णकम्॥ २००॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मचक्रूक नामक द्वारपाल यक्ष को प्रणाम करके कोटितीर्थ में स्नान करने से मनुष्य प्रचुर स्वर्ण-धन प्राप्त करता है ॥200॥
 
Thereafter, by paying obeisance to the gatekeeper Yaksha named Machkruk and taking bath in Kotitirtha, one attains abundant gold wealth. 200॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)