Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.83.189-190h: तत्पश्चात् नियमपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए कन्या आश्रम तीर्थ में जाना चाहिए। हे राजन! वहाँ तीन रात्रि उपवास करके नियमपूर्वक भोजन करने तथा नियमपूर्वक रहने से सौ दिव्य कन्याएँ प्राप्त होती हैं और वह मनुष्य स्वर्ग को जाता है। (189 1/2)   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 189-190h
 
 
श्लोक  3.83.189-190h 
तत: कन्याश्रमं गच्छेन्नियतो ब्रह्मचर्यवान्।
त्रिरात्रोपोषितो राजन्नियतो नियताशन:॥ १८९॥
लभेत् कन्याशतं दिव्यं स्वर्गलोकं च गच्छति।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् नियमपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए कन्या आश्रम तीर्थ में जाना चाहिए। हे राजन! वहाँ तीन रात्रि उपवास करके नियमपूर्वक भोजन करने तथा नियमपूर्वक रहने से सौ दिव्य कन्याएँ प्राप्त होती हैं और वह मनुष्य स्वर्ग को जाता है। (189 1/2)
 
Thereafter, living according to the rules and observing celibacy, one should go to the Kanya Ashram Tirtha. O King! By fasting there for three nights and eating regularly and following the rules, one obtains a hundred divine girls and that person goes to heaven. 189 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)