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mahabharat 3.83.188: इसमें कोई संदेह नहीं कि उस पवित्र स्थान में स्नान करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और सरस्वती लोक को प्राप्त करता है ॥188॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  3.83.188 
तस्मिंस्तीर्थे नर: स्नात्वा वाजिमेधफलं लभेत्।
सारस्वतीं गतिं चैव लभते नात्र संशय:॥ १८८॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि उस पवित्र स्थान में स्नान करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और सरस्वती लोक को प्राप्त करता है ॥188॥
 
There is no doubt that by taking bath in that holy place a man obtains the fruit of performing Ashwamedha Yagna and attains the world of Saraswati. ॥ 188॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)