Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.83.182-183h: तत्पश्चात एक रात्रि तीर्थ में जाकर मनुष्य नियम का पालन करता हुआ सत्यनिष्ठ होकर वहाँ एक रात्रि निवास करता है और ब्रह्मलोक में पूजित होता है ॥182 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकरात्रं समासाद्य एकरात्रोषितो नर:॥ १८२॥
नियत: सत्यवादी च ब्रह्मलोके महीयते।
अनुवाद
तत्पश्चात एक रात्रि तीर्थ में जाकर मनुष्य नियम का पालन करता हुआ सत्यनिष्ठ होकर वहाँ एक रात्रि निवास करता है और ब्रह्मलोक में पूजित होता है ॥182 1/2॥
Thereafter, by going to a one-night pilgrimage, a person follows the rules and stays truthful and stays there for one night and gets worshiped in Brahmalok. 182 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥