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mahabharat 3.83.174: नरेश्वर! तत्पश्चात तीर्थ-सेवक मनुष्य स्वस्तिपुर जाकर उसकी परिक्रमा करे, उसे हजार गोदान का फल मिलता है ॥174॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  3.83.174 
तत: स्वस्तिपुरं गच्छेत् तीर्थसेवी नराधिप।
प्रदक्षिणमुपावृत्य गोसहस्रफलं लभेत्॥ १७४॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात तीर्थ-सेवक मनुष्य स्वस्तिपुर जाकर उसकी परिक्रमा करे, उसे हजार गोदान का फल मिलता है ॥174॥
 
Nareshwar! Thereafter, a pilgrim-serving person should go to Swastipur and circumambulate it, he gets the result of thousand Godan. 174॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)