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mahabharat 3.83.172-173: शत्रुदमन महाराज! भगवान पद्मनाभ नारायण के पास जाकर (उनके दर्शन करके) मनुष्य तेजस्वी रूप धारण कर भगवान विष्णु के लोक को जाता है। पुरुषरत्न! समस्त देवताओं के तीर्थों में स्नान करके मनुष्य सभी दुःखों से मुक्त होकर चन्द्रमा के समान चमकता है। 172-173।   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 172-173
 
 
श्लोक  3.83.172-173 
नारायणं चाभिगम्य पद्मनाभमरिंदम।
राजमानो महाराज विष्णुलोकं च गच्छति॥ १७२॥
तीर्थेषु सर्वदेवानां स्नात: स पुरुषर्षभ।
सर्वदु:खै: परित्यक्तो द्योतते शशिवन्नर:॥ १७३॥
 
 
अनुवाद
शत्रुदमन महाराज! भगवान पद्मनाभ नारायण के पास जाकर (उनके दर्शन करके) मनुष्य तेजस्वी रूप धारण कर भगवान विष्णु के लोक को जाता है। पुरुषरत्न! समस्त देवताओं के तीर्थों में स्नान करके मनुष्य सभी दुःखों से मुक्त होकर चन्द्रमा के समान चमकता है। 172-173।
 
Shatrudaman Maharaj! By going near Lord Padmanabha Narayana (after seeing him) a man assumes a radiant form and goes to the world of Lord Vishnu. Purushratna! By bathing in the holy places of all the gods, a man becomes free from all sorrows and shines like the moon. 172-173.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)