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mahabharat 3.83.167: तत्पश्चात् नियमपूर्वक नियमित भोजन करते हुए स्वर्ग के द्वार पर जाना चाहिए। उस तीर्थ का सेवन करके मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त होता है और ब्रह्मलोक को जाता है॥167॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  3.83.167 
स्वर्गद्वारं ततो गच्छेन्नियतो नियताशन:।
स्वर्गलोकमवाप्नोति ब्रह्मलोकं च गच्छति॥ १६७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् नियमपूर्वक नियमित भोजन करते हुए स्वर्ग के द्वार पर जाना चाहिए। उस तीर्थ का सेवन करके मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त होता है और ब्रह्मलोक को जाता है॥167॥
 
Thereafter, being disciplined and taking regular meals, one should go to the gates of heaven. By consuming that pilgrimage, a man attains heaven and goes to Brahmaloka.॥ 167॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)