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mahabharat 3.83.163: वहाँ योगेश्वर और वृषभध्वज भगवान शिव स्वयं निवास करते हैं। उन भगवान की पूजा करके मनुष्य वहाँ जाने मात्र से सिद्ध हो जाता है। 163॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  3.83.163 
यत्र योगेश्वर: स्थाणु: स्वयमेव वृषध्वज:।
तमर्चयित्वा देवेशं गमनादेव सिध्यति॥ १६३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ योगेश्वर और वृषभध्वज भगवान शिव स्वयं निवास करते हैं। उन भगवान की पूजा करके मनुष्य वहाँ जाने मात्र से सिद्ध हो जाता है। 163॥
 
Lord Shiva himself resides there Yogeshwar and Vrishabhadhwaj. By worshiping that God, a person becomes perfect just by going there. 163॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)