तत्पश्चात् ब्रह्मचारी और जितेन्द्रिय पुरुष पंचवटी तीर्थ में जाकर महान पुण्यों को प्राप्त करके सत्पुरुषों के लोक में स्थित हो जाता है ॥162॥
Thereafter, a celibate and Jitendriya man, after going to Panchavati-tirtha and having great virtues, becomes established in the world of good men. 162॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥